हिंदी मिज़ाज | Hindi Mijaaj

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डॉ. कृपेश ठक्कर

डॉ. क्रुपेश ठक्कर

डॉ. क्रुपेश ठक्कर एक भारतीय गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्देशक, दिग्दर्शक, फिल्म निर्माता, बेस्ट सेलर लेखक, लाइफ कोच और म्यूजिक थेरेपिस्ट हैं। वह कृप म्यूजिक, कृप प्रोडक्शंस, कृप फिल्म्स, कृप पब्लिशिंग और गिव वाचा फाउंडेशन के संस्थापक हैं।

कई लोगों के जीवन में हकारात्मक प्रभाव लाते हुए एक लाइफ कोच के रूप में उन्होंने कई सारी उपलब्धियां प्राप्त की हैं। वह पर्व फ्यूजन बैंड के गिटारिस्ट और लीड वोकलिस्ट हैं। वह सुर गुजरात के, सुर हिंदुस्तान के, द मैजिकल म्यूजिशियन, नच ले और द ग्लोबल गुजरात शो के मेंटर और जज भी हैं।

उन्हें भारत और गुजरात के सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक थेरेपिस्ट में से एक के रूप में भी जाना जाता है। लेखक के रूप में डॉ. कृपेश ने सबसे बेस्ट सेलर बूक सीरीज “भगवद गीता फॉर लाइफ”, “जीवन में गूंजे गीता” और “द लव गाथा” लिखी है। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तकें हैं अर्जुन उवाच: आध्यात्मिक यात्रा, अर्जुन उवाच: द स्पिरिचुअल यात्रा, अर्जुन उवाच: मां पर्व, क्या है कानो?: ए बुक ऑफ लिरिक्स और अधूरा प्रेमनी कहानी। उनकी किताबें दुनिया भर में कृप पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित की जाती हैं।

फेस्टिवल डायरेक्टर के रूप में, वह दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले साहित्य महोत्सव “कृप लिटरेचर फेस्टिवल” का नेतृत्व कर रहे हैं।

कॉलम: पर्व की पाठशालाधर्म/आध्यात्महिंदी मिजाज विशेष

मंगला गौरी व्रत क्यों किया जाता है? | मंगला गौरी व्रत की कथा, महिमा, पूजन विधि और मुहूर्त | पर्व की पाठशाला

‘मंगला गौरी व्रत’ पूजा, आराधना और व्रत के माध्यम से माँ गौरी को प्रसन्न करने की परंपरा है। खासकर हिन्दू धर्म में इस व्रत कर खास तौर पर लड़कियों और महिलाओं के लिए विशेष महत्त्व है। इस साल में यह व्रत सावन महीने के पहले मंगलवार 23 जुलाई, से शुरू हुआ है और हर मंगलवार को रखा जाएगा। इस व्रत में माता गौरी और महादेव की पूजा की जाती है।

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श्रावण मास की महिमा, महत्व, नियम, अर्थ और कथा | श्रावण मास २०२४ कब है? | पर्व की पाठशाला

भगवान शिव को अति प्रिय है श्रावण मास! इस पवित्र महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है। चातुर्मास में आ रहे इस महीने में मुख्य रूप से भगवान महादेव और देवी पार्वती की आराधना होती है। इस महीने की पूर्णिमा मे श्रवण नक्षत्र आता है इस लिए इसे ‘श्रावण’ मास कहा जाता है। वर्ष 2024 के इस श्रावण महीने में इस बार पाँच सोमवार पड़ते है। पहले सोमवार से शुरू हो रहा यह श्रावण सबके लिए शुभ फलदायी और कल्याणकारी है। ‘पर्व की पाठशाला’ में हम जानेंगे पावन श्रावण मास की महिमा और इससे जुड़ी रोचक कहानियाँ। 

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महर्षि वेद व्यास की जयंती पर मनाया जाता है गुरु पूर्णिमा का पर्व | कबीर के दोहे | पर्व की पाठशाला

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को ‘गुरु पूर्णिमा’ के रूप में मनाया जाता है। इसे ‘व्यास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु के अवतार और आठ चिरंजीवियों में से एक महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। महर्षि व्यासजी ने वेदों की रचना की इसलिए उन्हें ‘वेद व्यास’ कहते हैं एवं गुरुओ के गुरु मानते हैं।

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देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास की महिमा, महत्व, नियम, अर्थ और कथा | पर्व की पाठशाला

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात देवशयनी एकादशी! जिसका वेदों और पुराणों ने बहुत महत्व बताया है। इस एकादशी का महत्व सबसे पहले ब्रह्मा जी ने नारदजी से कहा था, फिर महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया था। इस एकादशी से ही चतुर्मास का आरंभ होता है। चातुर्मास अर्थात वह चार महीने  जिनमें सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और पाताललोक में निवास करते हैं।

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जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा का इतिहास, महिमा और उससे जुड़ी कथा। – पर्व की पाठशाला

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की दूज को मनाया जाता है रथ त्योहार, जिसे सब रथयात्रा के नाम से जानते हैं। यह त्योहार सभी हिन्दू भक्तों के लिए बहुमूल्य उत्सव है, क्योंकी इस दीन जगत के नाथ यानि स्वयं भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों से मिलने मंदिर से बाहर आते हैं। कहा जाता है की अगर भक्त दो कदम चले तो भगवान दस कदम चलकर भक्त के पास आते हैं। इसी भाव का प्रतीक है यह रथयात्रा! पर्व की पाठशाला अर्थात त्योहारों की पाठशाला में आइए जानते हैं, इस रथयात्रा से जुड़े जाने अनजाने किस्से और भगवान जगन्नाथ के विशिष्ट स्वरूप की कहानी।

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Poem of the Day – छाँव जैसे पापा | किस्से कलम के

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में, प्रस्तुत है डॉ. कृपेश की प्रभावशाली कविता “छाँव जैसे पापा”, जो पिताओं के संघर्ष और कठिन परिश्रम को समर्पित है। यह कविता पिता-पुत्र के अनमोल रिश्ते को प्रतिबिंबित करती है और पिता की भूमिका को उजागर करती है, जो अपने बच्चों के लिए छाया की तरह है।

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Song of the Day – ना हुए जुदा | किस्से कलम के

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में, प्रस्तुत है, “ना हुए जुदा” डॉ. कृपेश ठक्कर द्वारा लिखा गया एक रोमांटिक गीत, जो प्यार और विछोह के भावों को सशक्त ढंग से व्यक्त करता है। गीत में प्रेमी अपने प्रिय से दूर होने की पीड़ा को व्यक्त करता है, लेकिन यह भी कहता है कि वह हमेशा उसके साथ है और उसके दिल में बसता है।

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Song of the Day – ऐ वतन, वंदे मातरम् | किस्से कलम के

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में प्रस्तुत है, “ऐ वतन, वंदे मातरम्” गीत, जो डॉ. कृपेश ठक्कर द्वारा लिखा गया एक देशभक्ति गीत है, जो भारत माता के प्रति अटूट समर्पण और प्रेम को व्यक्त करता है। गीत में डॉ. कृपेश अपने देश को अपने रग-रग में बहते हुए खून की तरह महसूस करते है और कहते है कि वह जहां भी रहे, वतन उनके साथ रहता है।

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Song of the Day – मंगलमय सब कर देना | किस्से कलम के

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में प्रस्तुत है “मंगलमय सब कर देना”। यह डॉ. कृपेश ठक्कर द्वारा लिखा गया एक हिंदी भक्तिगीत है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। गीत में भगवान गणेश को दुःखों का हरण करने वाला और सुख प्रदान करने वाला बताया गया है। भक्त उनके नाम का जाप करके सभी संकटों से मुक्ति पाने की प्रार्थना करता है। वह भगवान से क्षमा मांगता है और उनसे सभी को मंगलमय बनाने का आग्रह करता है।

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