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Song of the Day – ना हुए जुदा | किस्से कलम के

Column: कॉलम: किस्से कलम के | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में, प्रस्तुत है, “ना हुए जुदा” डॉ. कृपेश ठक्कर द्वारा लिखा गया एक रोमांटिक गीत, जो प्यार और विछोह के भावों को सशक्त ढंग से व्यक्त करता है। गीत में प्रेमी अपने प्रिय से दूर होने की पीड़ा को व्यक्त करता है, लेकिन यह भी कहता है कि वह हमेशा उसके साथ है और उसके दिल में बसता है।

गीत में प्रेमी की प्यारी बातों और खुशबू का जिक्र है, जो उसके चेहरे का नूर और साँसों में भरी हुई है। यह दर्शाता है कि प्रेमी के जाने के बाद भी, वह हर पल उसकी यादों में जीता है और उसके साथ है। “ना हुए जुदा” गीत प्यार के अटूट बंधन और विछोह की पीड़ा का एक सशक्त संगीतमय प्रतिनिधित्व है, जो श्रोताओं के दिलों को छू लेता है।


Song of the Day – ना हुए जुदा

तुम यही थे, तुम यही हो,
तुम रहोगे साथ सदा,
तुम दूर हो गए हमसे पर,
दूर हो गए हमसे पर,
ना हुए जुदा।
ना हुए जुदा तू हमसे, ना हुए जुदा,
तुम दूर हो गए हमसे पर, ना हुए जुदा।

अब तेरी प्यारी वो बातें,
मेरे चेहरे का नूर है,
तू नही है पर मेरी साँसें,
तेरी खुश्बू से भरपूर है,

अब बीते, मेरा हर पल,
तेरी यादों में ही सदा,
तुम दूर हो गए हमसे पर,
दूर हो गए हमसे पर,
ना हुए जुदा।
ना हुए जुदा तू हमसे, ना हुए जुदा,
तुम दूर हो गए हमसे पर, ना हुए जुदा।