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Song of the Day – ऐ वतन, वंदे मातरम् | किस्से कलम के

Column: कॉलम: किस्से कलम के | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में प्रस्तुत है, “ऐ वतन, वंदे मातरम्” गीत, जो डॉ. कृपेश ठक्कर द्वारा लिखा गया एक देशभक्ति गीत है, जो भारत माता के प्रति अटूट समर्पण और प्रेम को व्यक्त करता है। गीत में डॉ. कृपेश अपने देश को अपने रग-रग में बहते हुए खून की तरह महसूस करते है और कहते है कि वह जहां भी रहे, वतन उनके साथ रहता है।

गीत में देश की शान और सम्मान की रक्षा करना लेखक का कर्तव्य बताया गया है और उनका कहना है कि इस मिट्टी का उन पर बड़ा कर्ज है। वह अपनी जान वार देने के लिए तैयार है और दुआ करते है कि तिरंगा हमेशा ऊंचा रहे, चाहे वह रहे या ना रहे।

“वंदे मातरम्” का नारा गीत में बार-बार गूंजता है और देशभक्ति की भावना को और अधिक प्रबल करता है। यह गीत देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता का एक शक्तिशाली संदेश देता है और श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति की भावना को जगाता है।


Song of the Day – ऐ वतन, वंदे मातरम्

मेरी रग रग में खून बनके बहता हे तू,
में जहां भी रहुं साथ रहता है तू।

ऐ वतन, ऐ वतन तु सलामत रहे,
हम रहे ना रहे, ये तिरंगा रहे।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्

तेरी शान की हिफाज़त मेरा फर्ज है
इस मिट्टी का मुझ पर बड़ा कर्ज है

तुजपे जान वार दे, हर दुआ ये कहे
हम रहे ना रहे ये तिरंगा रहे।

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्
वंदे मातरम्, वंदे मातरम्

हर धडकन से गूंजे नारा,
तिरंगा उंचा रहे हमारा।