हिंदी मिज़ाज | Hindi Mijaaj

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डॉ. कृपेश ठक्कर

डॉ. क्रुपेश ठक्कर

डॉ. क्रुपेश ठक्कर एक भारतीय गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्देशक, दिग्दर्शक, फिल्म निर्माता, बेस्ट सेलर लेखक, लाइफ कोच और म्यूजिक थेरेपिस्ट हैं। वह कृप म्यूजिक, कृप प्रोडक्शंस, कृप फिल्म्स, कृप पब्लिशिंग और गिव वाचा फाउंडेशन के संस्थापक हैं।

कई लोगों के जीवन में हकारात्मक प्रभाव लाते हुए एक लाइफ कोच के रूप में उन्होंने कई सारी उपलब्धियां प्राप्त की हैं। वह पर्व फ्यूजन बैंड के गिटारिस्ट और लीड वोकलिस्ट हैं। वह सुर गुजरात के, सुर हिंदुस्तान के, द मैजिकल म्यूजिशियन, नच ले और द ग्लोबल गुजरात शो के मेंटर और जज भी हैं।

उन्हें भारत और गुजरात के सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक थेरेपिस्ट में से एक के रूप में भी जाना जाता है। लेखक के रूप में डॉ. कृपेश ने सबसे बेस्ट सेलर बूक सीरीज “भगवद गीता फॉर लाइफ”, “जीवन में गूंजे गीता” और “द लव गाथा” लिखी है। उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तकें हैं अर्जुन उवाच: आध्यात्मिक यात्रा, अर्जुन उवाच: द स्पिरिचुअल यात्रा, अर्जुन उवाच: मां पर्व, क्या है कानो?: ए बुक ऑफ लिरिक्स और अधूरा प्रेमनी कहानी। उनकी किताबें दुनिया भर में कृप पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित की जाती हैं।

फेस्टिवल डायरेक्टर के रूप में, वह दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले साहित्य महोत्सव “कृप लिटरेचर फेस्टिवल” का नेतृत्व कर रहे हैं।

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से शुरू हुई ‘म्युझिक थेरेपी फॉर ऑल’ की भारत यात्रा।

10 अक्टूबर, 2024 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से ‘म्यूजिक थेरेपी फॉर ऑल – इंडिया टूर’ शुरू हो गई है। जिसमें बेस्ट म्युझिक थेरपिस्ट ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध डॉ. क्रुपेश ठक्कर ‘अर्जुन’ ‘वसुधैव कुटुम्पकम’ की भावना के साथ 50 दिनों के लिए भारत के 25 शहरों में १ मिशन ‘लेट ध म्युझिक हिल’ के साथ म्युझिक थैरेपी के शरीर, मन और प्रकृति में होने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाएंगे।

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कॉलम: पर्व की पाठशालाधर्म/आध्यात्महिंदी मिजाज विशेष

शारदीय नवरात्र प्रारंभ | नवरात्रि पूजा, महत्व, महिमा और कहानी | पर्व की पाठशाला

नवरात्रि भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक है। संस्कृति और धर्म का उत्सव मनाने वाला यह त्योहार आमतौर पर साल में चार बार आता है। चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। आज ‘पर्व की पाठशाला’ में हम शारदीय नवरात्रि के बारे में जानेंगे। पितृपक्ष की समाप्ति के तुरंत बाद अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी इस वर्ष 3 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। जो 11 अक्टूबर को देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा के साथ नौ दिनों तक मनाया जाएगा और 12 अक्टूबर को दसवें दिन ‘विजयदशमी’ यानी ‘दशहरा’ के रूप में मनाया जाएगा।

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श्राद्ध पक्ष कब शुरू होता है? | श्राद्ध का महत्व एवं महिमा | श्राद्ध की पौराणिक कथा | पर्व की पाठशाला

सनातन धर्म में श्रद्धा भाव से पितरों को अर्पण करना ‘श्राद्ध’ कहलाता है! और भाद्रपद माह में सोलह दिनों तक मनाए जाने वाले श्राद्धों के समूह को ‘श्राद्ध पक्ष’ कहा जाता है! इस श्राद्ध पक्ष के दिनों को ‘पितृ तर्पण के दिन’ भी कहा जाता है। श्राद्ध पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होता है और इसी माह की अमास के साथ समाप्त होता है। ‘पर्व की पाठशाला’ में हम जानेंगे श्राद्ध पक्ष से जुड़ी रोचक बातें और कहानियां।

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वामन जयंती का महत्व, पूजा और पौराणिक कथा | भगवान विष्णु ने वामन अवतार क्यों लिया? | पर्व की पाठशाला

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की बारहवीं तिथि को ‘वामन जयंती’ के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘वामन द्वादशी’ भी कहते है। भागवत महापुराण के अनुसार त्रेता युग में भगवान विष्णु ‘वामन’ रूप धारण करके देवी अदिति के गर्भ से प्रकट हुए थे। इसलिए उनके जन्म दिवस को ‘वामन जयंती’ के रूप में मनाया जाता है। इससे पहले जब ‘पर्व की पाठशाला’ में देवशयनी एकादशी के अवसर पर हमें वामन भगवान का थोड़ा परिचय मिला था, तो अब उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके बारे में थोड़ा विस्तार से जानेंगे।

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पर्युषण पर्व क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है? | पर्युषण पर्व का इतिहास और महत्त्व | भगवान महावीर के जन्म की कथा | पर्व की पाठशाला

जैन धर्म में सभी त्योहारों का राजा कहलाता है ‘पर्यूषण पर्व’! इसे ‘महापर्व’ और ‘पर्वाधिराज’ भी कहा जाता है। क्योंकि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है ‘क्षमा’ और पर्युषण ‘क्षमा’ का पर्व है। इसलिए यह सभी जैन लोगों के लिए यह एक प्रमुख त्योहार है। आम तौर पर, पर्युषण आठ दिनों तक मनाया जाता है। जिसमें श्रावण महीने के आखिरी चार दिन और भाद्रपद महीने के पहले चार दिन शामिल होते हैं। जो इस साल 31 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक रहेगा। श्वेतांबर जैन आठ दिनों तक पर्यूषण मनाते हैं, जबकि दिगंबर जैन दस दिनों तक पर्यूषण मनाते हैं, इसलिए इसे ‘दसलक्षण पर्व’ भी कहते है। पर्व की पाठशाला में हम जानेंगे पर्युषण पर्व की रोचक बातें और भगवान महावीर के जन्म की कहानी।

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गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? गणेश चतुर्थी की कथा और महिमा | पर्व की पाठशाला

भगवान गणेश हिंदू धर्म में प्रमुख देवताओं में से एक हैं और उनका जन्मदिन यानी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि ‘गणेश चतुर्थी’ है। वैसे तो उनके नाम बारह, एक सौ आठ और एक हजार आठ हैं। लेकिन मुख्य रूप से उन्हें कई नामों से जाना जाता है जैसे देवगण के ‘ईश’ यानी ‘गणेश’, देवों के अधिपति यानी ‘गणपति’, विघ्नों को हरने वाले ‘विघ्नहर्ता’ और छोटे-बड़े सभी के प्रिय ‘गणपति बप्पा’। उनके प्रत्येक नाम का एक विशेष अर्थ और विशेष महत्व है। चाहे वह कोई भी प्रांत हो, राज्य हो या कोई भी संप्रदाय; प्रत्येक शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सनातन संस्कृति में इनका प्रमुख स्थान है। इसलिए कह सकते है कि ‘गणेश चतुर्थी’ सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही एक परंपरा है। ‘पर्व की पाठशाला’ में हम जानेंगे ‘गणेश चतुर्थी’ का महत्व और उनके जन्म की कहानी!

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कृष्ण जन्माष्टमी कब है? | जन्माष्टमी व्रत की विधि, महत्त्व, तिथि और शुभ मुहूर्त | कृष्ण जन्म की कथा | पर्व की पाठशाला

Column: पर्व की पाठशाला | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर ‘जन्माष्टमी’ भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण का जन्म दिवस

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रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता है? | जानिये रक्षाबंधन की कथा, महत्त्व और पौराणिक मान्यताएं | पर्व की पाठशाला

दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हिंदुओं को एक सूत्र से बाँधने वाला त्योहार है ‘रक्षाबंधन’! श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘राखी का त्योहार’ के नाम से भी जाना जाता है। भाई- बहन के विशिष्ट प्रेम के प्रतीक समान यह त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। चाहे वह देवराज इंद्र और इंद्राणी हों या स्वयं भगवान कृष्ण और द्रौपदी! कच्चे धागे से अटूट रक्षा का वचन निभाने की यह प्रथा आज भी कायम है। इस रक्षा सूत्र ने इंद्र को युद्ध में विजय दिलाई और द्रौपदी के सम्मान की भी रक्षा की। साथ ही भारत के इतिहास में ऐसे कई किस्से हैं।

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हिंदी मिजाज विशेष

15 अगस्त: भारत की स्वतंत्रता के अग्रदूतों को श्रद्धांजलि | पर्व की पाठशाला

15 अगस्त 1947 की सुबह एक स्वतंत्र और सार्वभौम भारत के जन्म का प्रतीक थी, यह एक ऐसा क्षण था जो साहस, बलिदान और स्वतंत्रता की अदम्य इच्छा की जीत से गूंजता था। जब तिरंगा आसमान में लहराता है, तो हमें न केवल उस स्वतंत्रता की याद आती है जिसे हम संजोते हैं, बल्कि उन अनगिनत शहीदों की भी याद आती है। जिन्होंने हमारी मातृभूमि को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आइए ‘पर्व की पाठशाला में, उन वीर सपूतों को याद कर श्रद्धांजलि दे।

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कॉलम: किस्से कलम केसाहित्यहिंदी मिजाज विशेष

Song of the Day – है नमन, शहीदों को सलाम | किस्से कलम के

“किस्से कलम के” की इस कड़ी में, प्रस्तुत है डॉ. कृपेश ठक्कर का हृदयस्पर्शी गीत “है नमन – शहीदों को सलाम”, जो कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को समर्पित है। यह गीत देशभक्ति की गहरी भावना से ओत-प्रोत है और शहीदों के अदम्य साहस और त्याग को बखूबी बयां करता है। गीतकार ने अपने शब्दों के माध्यम से शहीदों की शहादत को अमर कर दिया है और हम सभी को देश सेवा के लिए प्रेरित किया है।

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