श्रावण मास की महिमा, महत्व, नियम, अर्थ और कथा | श्रावण मास २०२४ कब है? | पर्व की पाठशाला
Column: पर्व की पाठशाला | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर
भगवान शिव को अति प्रिय है श्रावण मास! इस पवित्र महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है। चातुर्मास में आ रहे इस महीने में मुख्य रूप से भगवान महादेव और देवी पार्वती की आराधना होती है। इस महीने की पूर्णिमा मे श्रवण नक्षत्र आता है इस लिए इसे ‘श्रावण’ मास कहा जाता है। वर्ष 2024 में श्रावण महीना 22 जुलाई से 19 अगस्त तक होगा। श्रावण में इस बार पाँच सोमवार पड़ते है। पहले सोमवार से शुरू हो रहा यह श्रावण सबके लिए शुभ फलदायी और कल्याणकारी है। ‘पर्व की पाठशाला’ में हम जानेंगे पावन श्रावण मास की महिमा और इससे जुड़ी रोचक कहानियाँ।

महाभारत के अनुशासन पर्व मे सप्तऋषि में से एक अंगिरा ऋषि ने श्रावण महीने की महिमा बताते हुए कहा है की जो व्यक्ति इस महीने में अपने मन और इंद्रियों पर काबू करते हुए केवल एक समय भोजन करने का नियम रखता है; उसे अनेक तीर्थों में स्नान करने का पुण्य मिलता है। इसी लिए इस महीने में आम तौर पर लोग व्रत और उपवास करते है। विशेषतः कन्याएँ मनोवांछित जीवन साथी पाने के लिए सोमवार के दिन उपवास और शिव पूजा करती हैं। क्यों की स्वयं देवी पार्वती ने भी श्रावण मास में ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। जिसके फल स्वरूप महादेव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।

इस महीने में शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त जन शिव महिम्नः स्तुति, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिव मानस पूजा, लिंगाष्टकम, रुद्राभिषेक होम और शिव मंत्र की माला जप कर भगवान महादेव के प्रति अपनी अनन्य भक्ति अर्पित करते हैं। वही दूसरी ओर युवाओं में रोज शिव के भजन कीर्तन सुनने और शिव मंदिर में नियमित दर्शन करने का अनुरोध भी रहता है।
श्रावण महीने में हर रोज भगवान शिव का अभिषेक करने से भोले भंडारी महादेव सरलता से प्रसन्न हो मन की इच्छा पूरी करते हैं। इस बात के पीछे की कथा बहुत ही रोचक है। यह उस समय की बात है जब ऋषि दुर्वासा के शाप के कारण राजा इन्द्र और स्वर्ग ‘श्री हीन’ हो गए। उनकी सारी शक्तियाँ और लक्ष्मी उन्हें छोड़ कर समुद्र में समा गई। तब इस बात का फायदा उठाते हुए देवो और असुरों के बीच युद्ध हुआ। असुरों ने स्वर्ग पर आक्रमण कर कई देवताओं को भागने पर मजबूर किया।

स्वर्ग मे रखे अमृत कलश को असुरों से बचाने के लिए देव गण उस कलश को ले कर भाग रहे थे। तभी ही आकस्मिक रूप में वह कलश समुद्र में गिर गया। अमर बनाने वाले उस अमृत की चाह तो देवों और असुरों दोनों को ही थी। इस लिए सभी मिल कर त्रिदेव यानि की ब्रह्मा, विष्णु और शिव के पास पहुँचे। तब अमृत को वापस पाने के लिए समुद्र मंथन करने का निर्णय लिया गया। जिसके लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लिया और धुरा बन कर अपने ऊपर मन्दराचल पर्वत लिए समुद्र में उतर गए। वासुकि नाग को रस्सी बनाकर देव और असुर दोनों मंथन करने लगे।
इस तरह समुद्र मंथन करने पर समुद्र में से हलाहल विष बाहर आया। देवता और असुर दोनों घबरा गए। तब सभी ने मिलकर महादेव की आराधना की। भोले भण्डारी महादेव उन पर प्रसन्न हुए और सभी का कल्याण करने हेतु उन्होंने उस हलाहल विष को पी कर, गले मे धारण किया। जिससे उनका गला नीला पद गया और वह ‘नीलकंठ’ कहालाए। उस विष की गरमी से वह व्याकुल होने लगे। माना जाता है की तब चंद्र देव और गंगा उनके मस्तक पर विराजे और उन्हें शीतलता दी।
साथ ही सभी देवों ने मिल कर उन पर अभिषेक किया जिससे उनकी व्याकुलता शांत हुई। श्रावण काल में हुई इस घटना के आधार पर ही इस महीने के दौरान शिव अभिषेक करने को विशेष महत्त्व दिया जाता है। तभी तो श्रावण महीने में प्रकृति स्वयं भी वर्षा कर के इस पुण्य मे सहभागी होती है।
स्कन्द पुराण में भगवान शिव ने स्वयं सनतकुमारो से यह कहा था की श्रावण महीने की हर तिथि व्रत की तिथि है और हर दिन एक पर्व है, उत्सव है। इस महीने में शिस्त और संयम से व्रत करने से शक्ति और पुण्य मिलता है। वाकई में इस महीने से कई ऐसे अवसर जुड़े है जिनका सनातन संस्कृति में विशेष महत्त्व भी है और उससे जुड़ी विशेष कथाएँ भी जिनके बारे में हम ‘पर्व की पाठशाला’ में आगे बात करेंगे।
उत्तर भारत में श्रावण मास 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा। दक्षिण भारत में श्रावण मास 5 अगस्त से शुरू होकर 3 सितंबर को समाप्त होगा। (Shravan will start from 22nd July and ends at 19th August 2024 in North India. In South India Shravan Maas will start from 5th August and ends at 3rd September.)
महाभारत के अनुशासन पर्व मे सप्तऋषि में से एक अंगिरा ऋषि ने श्रावण महीने की महिमा बताते हुए कहा है की जो व्यक्ति इस महीने में अपने मन और इंद्रियों पर काबू करते हुए केवल एक समय भोजन करने का नियम रखता है; उसे अनेक तीर्थों में स्नान करने का पुण्य मिलता है। (In the Mahabharata’s Anushasana Parva, one of the Saptarishis, Angira Rishi, while describing the glory of the month of Shravan, has said that the person who controls his mind and senses and follows the rule of eating only once a day in this month, gets the virtue of bathing in many holy places.)
विशेषतः कन्याएँ मनोवांछित जीवन साथी पाने के लिए सोमवार के दिन उपवास और शिव पूजा करती हैं। क्यों की स्वयं देवी पार्वती ने भी श्रावण मास में ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। जिसके फल स्वरूप महादेव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। (Especially girls observe fast and worship Shiva on Mondays to get their desired life partner. Because Goddess Parvati herself had performed severe penance in the month of Shravan to please Lord Shiva. As a result of which Mahadev accepted her as his better half.)
श्रावण महीने में शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है। (In the month of Shravan, special benefits are obtained by anointing the Shiva linga with milk, Ganga water, honey and Panchamrit.)
श्रावण महीने में भक्त जन शिव महिम्नः स्तुति, शिव पंचाक्षर स्तोत्र, शिव मानस पूजा, लिंगाष्टकम, रुद्राभिषेक होम और शिव मंत्र की माला जप कर भगवान महादेव के प्रति अपनी अनन्य भक्ति अर्पित करते हैं। (In the month of Shravan, devotees offer their unalloyed devotion to Lord Mahadev by chanting Shiva Mahimnah Stuti, Shiva Panchakshar Stotra, Shiva Manas Puja, Lingashtakam, Rudrabhishek Homa and chanting Shiva Mantra.)
समुद्र मंथन करने पर समुद्र में से हलाहल विष बाहर आया। देवता और असुर दोनों घबरा गए। तब सभी ने मिलकर महादेव की आराधना की। भोले भण्डारी महादेव उन पर प्रसन्न हुए और सभी का कल्याण करने हेतु उन्होंने उस हलाहल विष को पी कर, गले मे धारण किया। जिससे उनका गला नीला पद गया और वह ‘नीलकंठ’ कहालाए। (On churning the ocean, the poison Halahal came out of the ocean. Both the gods and demons got scared. Then everyone together worshipped Mahadev. Bhole Bhandari Mahadev was pleased with them and for the welfare of all, he drank the poison and wore it around his neck. Due to which his throat turned blue and he was called ‘Neelkanth’.)
भगवान शिव को अति प्रिय है श्रावण मास! इस महीने में मुख्य रूप से भगवान महादेव और देवी पार्वती की आराधना होती है। जो व्यक्ति इस महीने में अपने मन और इंद्रियों पर काबू करते हुए केवल एक समय भोजन करने का नियम रखता है; उसे अनेक तीर्थों में स्नान करने का पुण्य मिलता है। इस महीने में आम तौर पर लोग व्रत और उपवास करते है। इस महीने में शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। (Lord Shiva loves the month of Shravan very much! In this month, mainly Lord Mahadev and Goddess Parvati are worshipped. The person who controls his mind and senses and keeps the rule of eating only once a day in this month; he gets the virtue of bathing in many holy places. People generally observe fasts in this month. In this month, anointing the Shivling with milk, Gangajal, honey and Panchamrit also gives special results.)
चातुर्मास में आ रहे इस महीने की पूर्णिमा मे श्रवण नक्षत्र आता है इस लिए इसे ‘श्रावण’ मास कहा जाता है। इस पवित्र महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व है। (The full moon of this month which falls during Chaturmas has Shravan Nakshatra, hence it is called ‘Shravan’ month. This holy month has special importance in Hinduism.)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन का इतिहास समुद्र मंथन से जुड़ा है, जब देवता और असुर अमृत की तलाश में एक साथ आए थे। इस घटना के कारण समुद्र मंथन हुआ, जिससे आभूषण और जानवरों सहित कई चीजें निकलीं। (According to mythology, the history of Sawan is linked to the Samudra Manthan, when the Devtas and Asuras came together in search of Amrit. This event led to the Samudra Manthan, which yielded many things including ornaments and animals.)
श्रावण मास भगवान शिव को अति प्रिय है। कन्याएँ मनोवांछित जीवन साथी पाने के लिए सोमवार के दिन उपवास और शिव पूजा करती हैं। शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है। श्रावण महीने में हर रोज भगवान शिव का अभिषेक करने से भोले भंडारी महादेव सरलता से प्रसन्न हो मन की इच्छा पूरी करते हैं। (Shravan month is very dear to Lord Shiva. Girls observe fast and do Shiva Puja on Mondays to get their desired life partner. Abhishek of Shivling with milk, Gangajal, honey and Panchamrit also gives special results. By anointing Lord Shiva every day in Shravan month, Bhole Bhandari Mahadev easily gets pleased and fulfills the wishes of the heart.)
सावन के दौरान शिवलिंग पर दूध, गंगाजल, शहद और पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए। सावन के दौरान कई भक्त उन्हें चंदन का लेप लगाते हैं। (During Sawan, Shivling should be anointed with milk, Gangajal, honey and panchamrit. Many devotees apply sandalwood paste on it during Sawan.)
देवी पार्वती ने श्रावण मास में ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। जिसके फल स्वरूप महादेव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। (Goddess Parvati had performed severe penance in the month of Shravan to please Lord Shiva. As a result, Mahadev accepted her as his Ardhangini.)
श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। (Shravan month is dedicated to Lord Shiva, one of the main deities in Hinduism.)
इस महीनें में मांशाहार, प्याज, और लहसुन का सेवन वर्जित होता है। इसके अलावा शराब का सेवन भी इस पूरे महीने में नहीं करना चाहिए। (Consumption of non-vegetarian food, onion, and garlic is prohibited in this month. Apart from this, alcohol should also not be consumed during this entire month.)
अनाज, दालें और मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। फल, दूध और अन्य हल्के सात्विक खाद्य पदार्थों की अनुमति है। शिवजी की पूजा, पूरे दिन मंत्रों का जाप, और शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। (Cereals, pulses and non-vegetarian food should not be consumed. Fruits, milk and other light satvik foods are allowed. Worship of Lord Shiva, chanting of mantras throughout the day, and recitation of Shiva Chalisa should be done.)
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में श्रावण का महिना 5 अगस्त से शुरू होकर 3 सितंबर को समाप्त होगा। (In states like Andhra Pradesh, Telangana, Goa, Maharashtra, Gujarat, Karnataka and Tamil Nadu, the month of Shravan will start from August 5 and end on September 3.)
राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में श्रावण का महिना 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त 2024 को समाप्त होगा। (In states like Rajasthan, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Punjab, Himachal Pradesh, Uttarakhand, Chhattisgarh, Bihar and Jharkhand, the month of Shravan will start from July 22 and end on August 19, 2024.)