Song of the Day – है नमन, शहीदों को सलाम | किस्से कलम के
Column: कॉलम: किस्से कलम के | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर
“किस्से कलम के” की इस कड़ी में, प्रस्तुत है डॉ. कृपेश ठक्कर का हृदयस्पर्शी गीत “है नमन – शहीदों को सलाम”, जो कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को समर्पित है। यह गीत देशभक्ति की गहरी भावना से ओत-प्रोत है और शहीदों के अदम्य साहस और त्याग को बखूबी बयां करता है। गीतकार ने अपने शब्दों के माध्यम से शहीदों की शहादत को अमर कर दिया है और हम सभी को देश सेवा के लिए प्रेरित किया है।
गीत के बोलों में शहीदों के प्रति गहरा सम्मान झलकता है। गीतकार कहते हैं कि शहीदों ने मातृभूमि की खातिर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और हम कभी भी उनका ऋण चुका नहीं सकते। वे कहते हैं कि हर भारतीय शहीदों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता। गीत में शहीदों के परिवारों के दुःख को भी बखूबी बयान किया गया है। गीतकार कहते हैं कि शहीदों के परिवारों ने भी बहुत कुछ खोया है और उनके बलिदान को हमेशा याद रखना चाहिए।

यह गीत न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि है बल्कि यह युवा पीढ़ी को देश सेवा के लिए प्रेरित करने का भी एक प्रयास है। गीतकार कहते हैं कि शहीदों के बलिदान से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए और देश सेवा के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। “है नमन – शहीदों को सलाम” एक ऐसा गीत है जो दिलों को छू लेता है और देशभक्ति की भावना को जागृत करता है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारी आजादी के लिए कितने लोगों ने बलिदान दिया है और हमें उनके बलिदान को कभी नहीं भूलना चाहिए।
आइए, हम सभी मिलकर शहीदों को नमन करें और उनके बलिदान को कभी ना भूलें।
Song of the Day – है नमन, शहीदों को सलाम
जो मातृभूमि की खातिर,
दी है तुमने क़ुरबानी,
ना भूलेंगे इस ऋण को,
कहे आज हर हिन्दुस्तानी;
है नमन, है नमन,
शहीदों आपको, है नमन
वंदे मातरम, वंदे मातरम,
वंदे मातरम, वंदे मातरम;
ना था मेरा तु अपना,
पर लगता अपनों से बढ़कर,
देने घर मेरे खुशहाली,
तु डटा रहा सरहद पर,
तु डटा रहा सरहद पर;
जो लहू बहा है तेरा,
लिखी उसने अमर कहानी,
ना भूलेंगे इस ऋण को,
कहे आज हर हिन्दुस्तानी;
है नमन, है नमन,
शहीदों आपको, है नमन
वंदे मातरम, वंदे मातरम,
वंदे मातरम, वंदे मातरम;
है नमन, शहीदों को सलाम गीत सुने
कारगिल युद्ध पर सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
कारगिल युद्ध आधिकारिक तौर पर 7 जून, 1999 को शुरू हुआ था।
कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ा गया था।
भारत ने कारगिल युद्ध में 26 जुलाई, 1999 को विजय प्राप्त की थी।
कारगिल विजय दिवस भारत की सेना द्वारा कारगिल युद्ध में प्राप्त विजय का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन शहीदों को श्रद्धांजलि देने और उनके बलिदान को याद रखने के लिए समर्पित है।
कारगिल युद्ध के प्रमुख नायकों में से कुछ हैं: कैप्टन विक्रम बत्रा (शेर शाह), कैप्टन मनोज कुमार पांडे, लेफ्टिनेंट बलवान सिंह, मेजर राजेश सिंह अधिकारी, राइफलमैन संजय कुमार, मेजर विवेक गुप्ता आदि।
कारगिल युद्ध में लगभग 527 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
कारगिल युद्ध ने भारत की राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया और देश के सैनिकों के साहस और बलिदान को प्रदर्शित किया। इस युद्ध ने भारत की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
कारगिल शहीदों की याद में स्मारक बनाए गए हैं, उनके नाम पर सड़कें, स्कूल और अन्य संस्थानों का नामकरण किया गया है, और हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।
कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना को कठिन मौसम, उच्च ऊंचाई, दुर्गम इलाके और दुश्मन की घातक रणनीति जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
भारतीय सेना ने साहस, दृढ़ संकल्प और कुशल योजना के साथ कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की। भारतीय सैनिकों ने दुश्मन को पीछे धकेलने के लिए कठिन परिस्थितियों में भी लड़ाई लड़ी।
कारगिल युद्ध के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव बढ़ गया था।
कारगिल विजय दिवस पर झंडा फहराया जाता है, शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, मार्च पास्ट आयोजित किए जाते हैं, और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कारगिल युद्ध मई से जुलाई 1999 के बीच भारत और पाकिस्तान के मध्य लड़ा गया था।
कारगिल युद्ध में अनेक वीर सैनिकों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। हालांकि, कुछ नाम विशेष रूप से उभर कर आए। कैप्टन विक्रम बत्रा (शेर शाह), लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, और मेजर राजीव राणा जैसे सैनिकों की बहादुरी ने देश को गौरवान्वित किया।
कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ थे। नवाज शरीफ 1997 से 1999 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे।
भारत ने 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर करारी जीत हासिल की थी।
कारगिल युद्ध के दौरान इजरायल ने भारत की मदद की थी। इजरायल ने गाइडेड एम्युनिशन और ड्रोन समेत अन्य मिलिट्री सप्लाय और इक्विपमेंट देकर भारतीय सेना की मदद की थी।
कारगिल युद्ध के पहले शहीद कैप्टन सौरभ कालिया थे। वह 4 जून 1999 को कारगिल सेक्टर में शहीद हो गए थे।
भारतीय सेना को पता चला कि पाकिस्तानी लड़ाकों ने भारतीय प्रशासित क्षेत्र में घुसपैठ की है। घुसपैठ का पता लगाने के बाद, भारत ने अपनी सेना और वायु सेना को घुसपैठियों को पीछे धकेलने का आदेश दिया।
कारगिल युद्ध के समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे। उन्होंने 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण के बाद कश्मीर में बढ़ते तनाव के बीच इस युद्ध का नेतृत्व किया।
कारगिल युद्ध लगभग दो महीने तक चला था, जो मई 1999 से जुलाई 1999 तक चला। इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान की घुसपैठ का सामना किया और अंततः जीत हासिल की।
कारगिल युद्ध के दौरान भारत के राष्ट्रपति के. आर. नारायणन थे।
26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध समाप्त हुआ था, जब भारत ने पाकिस्तान की घुसपैठ को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। इस दिन भारतीय सेना ने कारगिल क्षेत्र में रणनीतिक चोटियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त किया, जिससे युद्ध का अंत हुआ और भारत ने इस संघर्ष में विजय हासिल की। यह दिन भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को याद करने का दिन है।
कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान की सेना का प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ था।
वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, इन चार बहादुर सैनिकों को उनके असाधारण साहस और बलिदान के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था. जिनमें कैप्टन विक्रम बत्रा, राइफलमैन संजय कुमार, ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव और लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे शामिल है.
ऑपरेशन विजय 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना द्वारा चलाया गया एक सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए क्षेत्रों को मुक्त करना था।
ऑपरेशन विजय की शुरुआत 26 मई 1999 को हुई थी, जब भारतीय सेना ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
ऑपरेशन विजय का नाम इसीलिए रखा गया क्योंकि इसका उद्देश्य युद्ध में विजय प्राप्त करना और भारतीय क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
ऑपरेशन विजय के परिणाम स्वरूप भारत ने कारगिल क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत किया और पाकिस्तान को युद्ध में करारी हार का सामना करना पड़ा।
भारत ने 26 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय में जीत हासिल की, जब भारतीय सेना ने कारगिल क्षेत्र में सभी प्रमुख चोटियों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया।