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Month: August 2024

कॉलम: पर्व की पाठशालाधर्म/आध्यात्महिंदी मिजाज विशेष

पर्युषण पर्व क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है? | पर्युषण पर्व का इतिहास और महत्त्व | भगवान महावीर के जन्म की कथा | पर्व की पाठशाला

जैन धर्म में सभी त्योहारों का राजा कहलाता है ‘पर्यूषण पर्व’! इसे ‘महापर्व’ और ‘पर्वाधिराज’ भी कहा जाता है। क्योंकि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों में से एक है ‘क्षमा’ और पर्युषण ‘क्षमा’ का पर्व है। इसलिए यह सभी जैन लोगों के लिए यह एक प्रमुख त्योहार है। आम तौर पर, पर्युषण आठ दिनों तक मनाया जाता है। जिसमें श्रावण महीने के आखिरी चार दिन और भाद्रपद महीने के पहले चार दिन शामिल होते हैं। जो इस साल 31 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक रहेगा। श्वेतांबर जैन आठ दिनों तक पर्यूषण मनाते हैं, जबकि दिगंबर जैन दस दिनों तक पर्यूषण मनाते हैं, इसलिए इसे ‘दसलक्षण पर्व’ भी कहते है। पर्व की पाठशाला में हम जानेंगे पर्युषण पर्व की रोचक बातें और भगवान महावीर के जन्म की कहानी।

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गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? गणेश चतुर्थी की कथा और महिमा | पर्व की पाठशाला

भगवान गणेश हिंदू धर्म में प्रमुख देवताओं में से एक हैं और उनका जन्मदिन यानी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानि ‘गणेश चतुर्थी’ है। वैसे तो उनके नाम बारह, एक सौ आठ और एक हजार आठ हैं। लेकिन मुख्य रूप से उन्हें कई नामों से जाना जाता है जैसे देवगण के ‘ईश’ यानी ‘गणेश’, देवों के अधिपति यानी ‘गणपति’, विघ्नों को हरने वाले ‘विघ्नहर्ता’ और छोटे-बड़े सभी के प्रिय ‘गणपति बप्पा’। उनके प्रत्येक नाम का एक विशेष अर्थ और विशेष महत्व है। चाहे वह कोई भी प्रांत हो, राज्य हो या कोई भी संप्रदाय; प्रत्येक शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। सनातन संस्कृति में इनका प्रमुख स्थान है। इसलिए कह सकते है कि ‘गणेश चतुर्थी’ सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि वर्षों से चली आ रही एक परंपरा है। ‘पर्व की पाठशाला’ में हम जानेंगे ‘गणेश चतुर्थी’ का महत्व और उनके जन्म की कहानी!

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कृष्ण जन्माष्टमी कब है? | जन्माष्टमी व्रत की विधि, महत्त्व, तिथि और शुभ मुहूर्त | कृष्ण जन्म की कथा | पर्व की पाठशाला

Column: पर्व की पाठशाला | Writer: डॉ. कृपेश ठक्कर ‘जन्माष्टमी’ भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण का जन्म दिवस

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रक्षाबंधन का त्योहार क्यों मनाया जाता है? | जानिये रक्षाबंधन की कथा, महत्त्व और पौराणिक मान्यताएं | पर्व की पाठशाला

दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हिंदुओं को एक सूत्र से बाँधने वाला त्योहार है ‘रक्षाबंधन’! श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘राखी का त्योहार’ के नाम से भी जाना जाता है। भाई- बहन के विशिष्ट प्रेम के प्रतीक समान यह त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जाता रहा है। चाहे वह देवराज इंद्र और इंद्राणी हों या स्वयं भगवान कृष्ण और द्रौपदी! कच्चे धागे से अटूट रक्षा का वचन निभाने की यह प्रथा आज भी कायम है। इस रक्षा सूत्र ने इंद्र को युद्ध में विजय दिलाई और द्रौपदी के सम्मान की भी रक्षा की। साथ ही भारत के इतिहास में ऐसे कई किस्से हैं।

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हिंदी मिजाज विशेष

15 अगस्त: भारत की स्वतंत्रता के अग्रदूतों को श्रद्धांजलि | पर्व की पाठशाला

15 अगस्त 1947 की सुबह एक स्वतंत्र और सार्वभौम भारत के जन्म का प्रतीक थी, यह एक ऐसा क्षण था जो साहस, बलिदान और स्वतंत्रता की अदम्य इच्छा की जीत से गूंजता था। जब तिरंगा आसमान में लहराता है, तो हमें न केवल उस स्वतंत्रता की याद आती है जिसे हम संजोते हैं, बल्कि उन अनगिनत शहीदों की भी याद आती है। जिन्होंने हमारी मातृभूमि को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आइए ‘पर्व की पाठशाला में, उन वीर सपूतों को याद कर श्रद्धांजलि दे।

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