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कॉलम: पर्व की पाठशाला

पर्व की पाठशाला कॉलम में भारतीय त्योहारों और हिन्दू धर्म एवं संस्कृति के महत्वपूर्ण दिनों की जानकारी, उससे जुड़ी कथाएं और तथ्य प्रकाशित होंगे। इस कॉलम के लेखक हैं डॉ. कृपेश ठक्कर। जो अपनी ‘भगवद् गीता फॉर लाइफ’ पुस्तक श्रेणी के आध्यात्मिक साहित्य तथा ‘ध लव गाथा’ पुस्तक श्रेणी की रोमेंटिक नॉवेल के लिए प्रसिद्ध हैं।

पर्व की पाठशाला कॉलम में भारतीय त्योहारों और हिन्दू धर्म एवं संस्कृति के महत्वपूर्ण दिनों की जानकारी, उससे जुड़ी कथाएं और तथ्य प्रकाशित होंगे। इस कॉलम के लेखक हैं डॉ. कृपेश ठक्कर। जो अपनी ‘भगवद् गीता फॉर लाइफ’ पुस्तक श्रेणी के आध्यात्मिक साहित्य तथा ‘ध लव गाथा’ पुस्तक श्रेणी की रोमेंटिक नॉवेल के लिए प्रसिद्ध हैं। यह पुस्तकें देश विदेश में बेस्ट सेलर बनी हैं। डॉ. कृपेश की कॉलम गुजरात के प्रसिद्ध समाचार पत्रों में भी प्रकाशित होती है।

लेखक होने के अलावा डॉ. कृपेश गीतकार, संगीतकार, गायक, निर्देशक, दिग्दर्शक, फिल्म निर्माता और म्युझिक थेरेपिस्ट हैं। उनके १०० से अधिक गीत वैश्विक स्तर पर लॉन्च हुए हैं। उन्होंने १८ से ज्यादा फिल्मों, २५ से अधिक म्युझिक वीडियो में काम किया है।

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देवशयनी एकादशी एवं चातुर्मास की महिमा, महत्व, नियम, अर्थ और कथा | पर्व की पाठशाला

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात देवशयनी एकादशी! जिसका वेदों और पुराणों ने बहुत महत्व बताया है। इस एकादशी का महत्व सबसे पहले ब्रह्मा जी ने नारदजी से कहा था, फिर महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को समझाया था। इस एकादशी से ही चतुर्मास का आरंभ होता है। चातुर्मास अर्थात वह चार महीने  जिनमें सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और पाताललोक में निवास करते हैं।

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जगन्नाथ पुरी की रथयात्रा का इतिहास, महिमा और उससे जुड़ी कथा। – पर्व की पाठशाला

आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की दूज को मनाया जाता है रथ त्योहार, जिसे सब रथयात्रा के नाम से जानते हैं। यह त्योहार सभी हिन्दू भक्तों के लिए बहुमूल्य उत्सव है, क्योंकी इस दीन जगत के नाथ यानि स्वयं भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों से मिलने मंदिर से बाहर आते हैं। कहा जाता है की अगर भक्त दो कदम चले तो भगवान दस कदम चलकर भक्त के पास आते हैं। इसी भाव का प्रतीक है यह रथयात्रा! पर्व की पाठशाला अर्थात त्योहारों की पाठशाला में आइए जानते हैं, इस रथयात्रा से जुड़े जाने अनजाने किस्से और भगवान जगन्नाथ के विशिष्ट स्वरूप की कहानी।

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